Skip to main content
Dr. Surabhi Mathur – Psychiatrist in Jaipur

सवाल-जवाब · इलाज के लिए जयपुर आने वाले परिवारों के लिए

परिवार के किसी सदस्य को मानसिक इलाज के लिए जयपुर कैसे लाएँ

जब घर में किसी की मानसिक हालत बिगड़ रही हो, तो परिवार अक्सर उलझन में रहता है कि बात कहाँ से शुरू करें, और अगर वह व्यक्ति डॉक्टर के पास जाने से मना कर दे तो क्या करें। ये सुझाव उन परिवारों के लिए हैं जो दूसरे ज़िलों से इलाज के लिए जयपुर आने की सोच रहे हैं।

बात कैसे शुरू करें

सही समय और जगह चुनें: जब घर शांत हो, व्यक्ति नशे में न हो और अभी-अभी कोई झगड़ा न हुआ हो। उनसे अकेले में और धीमी आवाज़ में बात करें, ताकि उन्हें लगे कि यह मदद की बातचीत है, सबके सामने की पेशी नहीं।

दोष देने के बजाय वह बताएँ जो आपने देखा है और जिसकी आपको चिंता है। ‘तुम पागलों जैसी बातें करते हो’ कहने के बजाय कहें, ‘कुछ हफ़्तों से तुम ठीक से सो नहीं पा रहे और बहुत थके लगते हो, मुझे तुम्हारी फ़िक्र है।’ नींद, थकान, सिरदर्द, घबराहट या काम में मन न लगना जैसी बातें व्यक्ति अक्सर ख़ुद भी मानता है, इसलिए वहीं से शुरुआत आसान रहती है।

उन्हें भरोसा दिलाएँ कि मनोचिकित्सक से मिलने का मतलब यह नहीं कि कोई उन्हें ‘पागल’ कह रहा है। डॉक्टर से बातचीत गोपनीय होती है, और पहली मुलाकात ज़्यादातर बात करने और समझने के लिए होती है।

  • एक ही बार में पूरी बात मनवाने की कोशिश न करें; कुछ दिन बाद दोबारा बात करना ठीक है।
  • परिवार में से वह व्यक्ति बात करे जिस पर उन्हें सबसे ज़्यादा भरोसा है।
  • उनकी बात बीच में काटे बिना सुनें, भले ही वह आपको ग़लत लगे।
  • पूछें कि उन्हें किस बात का डर है: दवा का, लोगों के कहने का, या अस्पताल में भर्ती का।

अगर वे आने से मना कर दें

बहुत से लोग पहली बार में मना कर देते हैं, ख़ासकर जब उन्हें अपनी हालत बीमारी जैसी नहीं लगती। ऐसे में परिवार के एक-दो सदस्य पहले ख़ुद डॉ. सुरभि माथुर से मिलकर पूरी स्थिति बता सकते हैं और सलाह ले सकते हैं कि व्यक्ति से कैसे बात करें, किन बातों पर नज़र रखें और कब तुरंत मदद लेनी चाहिए।

कई लोग ‘मानसिक डॉक्टर’ के बजाय नींद, घबराहट या सिरदर्द के लिए डॉक्टर से मिलने को आसानी से मान जाते हैं, क्योंकि यह उनकी अपनी तकलीफ़ है। लेकिन उन्हें धोखे से न लाएँ, जैसे किसी शादी या रिश्तेदार से मिलने का बहाना बनाकर। धोखा पता चलने पर भरोसा टूटता है और अगली बार लाना और मुश्किल हो जाता है।

अगर समस्या शराब या किसी दूसरे नशे की है, तो उस समय बात करें जब व्यक्ति होश में हो, और नशे पर बहस करने के बजाय उसके असर पर बात करें: सेहत, पैसा, बच्चे और काम।

यात्रा के दिन की तैयारी

दूसरे ज़िले से आना हो तो पहले से अपॉइंटमेंट लें। क्लिनिक सोमवार से शनिवार केवल पूर्व अपॉइंटमेंट से खुलता है; 72404-45656 पर कॉल करें या व्हाट्सएप करें, और बताएँ कि आप कहाँ से आ रहे हैं, ताकि ऐसा समय तय हो सके जिसमें आराम से पहुँचना और हो सके तो उसी दिन लौटना संभव हो।

बेचैन या बहुत बीमार व्यक्ति के लिए लंबा सफ़र थकाने वाला होता है। हो सके तो अपनी या किराए की गाड़ी से आएँ, ताकि बीच में रुक सकें; बस या ट्रेन से आएँ तो सबसे ज़्यादा भीड़ वाले समय से बचें। पानी, कुछ खाने का सामान और व्यक्ति की रोज़ की दवाएँ साथ रखें।

परिवार के दो लोग साथ आएँ तो अच्छा रहता है: एक मरीज़ के साथ रहे और दूसरा पर्चियाँ, रिपोर्ट और बाकी काम संभाले। पुरानी पर्चियाँ, दवाओं के पत्ते और जाँच की रिपोर्ट एक ही थैले में रख लें, ताकि कुछ घर पर न छूटे।

क्या बिल्कुल न करें

हताशा में परिवार कभी-कभी ऐसे कदम उठा लेते हैं जो व्यक्ति को और नुकसान पहुँचाते हैं और इलाज को मुश्किल बना देते हैं। इनसे बचें:

  • बताए बिना खाने या पानी में कोई दवा न मिलाएँ। शराब छुड़ाने के नाम पर बिकने वाली कुछ दवाएँ, अनजाने में शराब पी लेने पर गंभीर और ख़तरनाक प्रतिक्रिया कर सकती हैं, और कोई भी दवा छिपाकर देने से भरोसा टूटता है।
  • किसी को रस्सी या ज़ंजीर से न बाँधें और कमरे में बंद न करें। इससे चोट लगती है, डर और गहरा होता है, और मानसिक रोग वाले व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार क़ानून के ख़िलाफ़ भी है।
  • किसी रिश्तेदार, पड़ोसी या दुकानदार के कहने पर चल रहा इलाज या दवा अचानक बंद न करें; कोई चिंता हो तो पहले डॉक्टर से बात करें।
  • मारपीट, ताने या ‘नाटक कर रहा है’ जैसी बातों से बचें; इनसे व्यक्ति परिवार से और दूर हो जाता है।

आस्था और इलाज साथ-साथ

बहुत से परिवार मंदिर, दरगाह या अपने कुलदेवता के स्थान पर भी जाते हैं, और यह उनकी आस्था का हिस्सा है। इलाज के लिए आस्था छोड़ने की ज़रूरत नहीं; प्रार्थना और परिवार का साथ कई लोगों को ताक़त देते हैं।

बस इतना ध्यान रखें कि आस्था के नाम पर इलाज में देर न हो। लगातार उदासी, हर समय डर, आवाज़ें सुनाई देना, गहरा शक या अजीब व्यवहार, और नींद का पूरी तरह बिगड़ जाना बीमारी के लक्षण हैं, जिनका इलाज संभव है। अगर कहीं भी व्यक्ति को मारा-पीटा जाए, भूखा रखा जाए या बाँधा जाए, तो उसे वहाँ से हटा लें।

डॉ. माथुर को आप खुलकर बता सकते हैं कि अब तक कहाँ-कहाँ दिखाया गया और क्या-क्या किया गया। इससे कोई नाराज़गी नहीं होती, बल्कि पूरी तस्वीर समझने में मदद मिलती है।

कब तुरंत मदद लें

कुछ हालात में अपॉइंटमेंट का इंतज़ार नहीं करना चाहिए: जब व्यक्ति अपनी जान लेने की बात करे या कोशिश करे, किसी को मारने की धमकी दे या हमला करे, कई दिन से खाना-पानी छोड़ दे, या शराब छोड़ने के बाद तेज़ कँपकँपी, भ्रम या दौरे जैसे लक्षण आएँ।

ऐसे में 112 पर कॉल करें या व्यक्ति को तुरंत नज़दीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग ले जाएँ। सलाह के लिए भारत सरकार की निःशुल्क 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन टेली-मानस 14416 पर भी बात कर सकते हैं। हालत संभलने के बाद आगे के इलाज के लिए क्लिनिक से संपर्क करें; ज़रूरत हो तो नारायणा हॉस्पिटल, प्रताप नगर में भर्ती की व्यवस्था की जा सकती है, जहाँ डॉ. माथुर कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट हैं।

अगर किसी की जान को ख़तरा हो तो 112 पर कॉल करें या तुरंत नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ। सलाह के लिए भारत सरकार की निःशुल्क 24×7 हेल्पलाइन टेली-मानस: 14416।

यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। आपके या आपके परिवार के लिए सही इलाज डॉक्टर से मिलकर ही तय होता है। चिकित्सा अस्वीकरण

सवाल-जवाब

और सवाल-जवाब

कोई और सवाल हो तो हमें कॉल करें, हम मदद करेंगे।

कॉल करें 72404-45656

क्या मरीज़ को साथ लाए बिना डॉक्टर से मिल सकते हैं?

हाँ। परिवार के सदस्य पहले अकेले आकर स्थिति बता सकते हैं और सलाह ले सकते हैं कि व्यक्ति को कैसे राज़ी करें। निदान और दवा के लिए आमतौर पर व्यक्ति से ख़ुद मिलना ज़रूरी होता है, इसलिए अगला कदम उन्हें साथ लाने का होता है।

अगर व्यक्ति बालिग है और साफ़ मना कर रहा है, तो क्या ज़बरदस्ती ला सकते हैं?

बालिग व्यक्ति की सहमति मायने रखती है, और ज़बरदस्ती करने से अक्सर नुकसान ही होता है। अगर व्यक्ति अपने या दूसरों के लिए ख़तरा बन गया हो, तो 112 पर कॉल करें या इमरजेंसी विभाग जाएँ। ऐसे हालात के लिए मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 में प्रक्रिया तय है, जो डॉक्टर परिवार को समझाते हैं।

क्या मनोचिकित्सक के पास जाने की बात गाँव या रिश्तेदारों को पता चलेगी?

नहीं। परामर्श और रिकॉर्ड गोपनीय रहते हैं और आपकी सहमति के बिना किसी को नहीं बताए जाते। किसे बताना है, यह आप ख़ुद तय करते हैं।

कोई सवाल बाकी है? परामर्श बुक करें या हमसे बात करें।

तनाव, चिंता, डिप्रेशन या कोई भी भावनात्मक परेशानी हो, मदद बस एक बातचीत की दूरी पर है।

संकट की स्थिति में या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आएँ तो टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 (निःशुल्क, 24×7) पर कॉल करें या नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ।