डॉ. सुरभि माथुर निर्माण नगर, जयपुर के अपने क्लिनिक में वयस्कों और किशोरों को गुस्सा समझने और संभालने में मदद करती हैं, और उस अंदरूनी समस्या को भी खोजती हैं जो इसे भड़का रही हो।
गुस्से की समस्या को समझें
गुस्सा अपने आप में एक सामान्य भावना है, कोई बीमारी नहीं। यह समस्या तब बनता है जब इससे चिल्लाना, चीज़ें तोड़ना या दूसरों को या ख़ुद को चोट पहुँचाना होने लगे, या जब इसे दबाकर रखा जाए और यह कड़वाहट या शारीरिक लक्षणों के रूप में निकले।
बार-बार का गुस्सा अक्सर किसी और चीज़ से जुड़ा होता है: लंबा तनाव, डिप्रेशन, चिंता, ADHD, बाइपोलर डिसऑर्डर, शराब या नशा, पुराना ट्रॉमा, या 'इंटरमिटेंट एक्सप्लोसिव डिसऑर्डर' नाम की स्थिति, जिसमें गुस्से के दौरे वजह के मुक़ाबले बहुत ज़्यादा होते हैं। वजह पहचानना पहला कदम है, क्योंकि उसी से इलाज तय होता है।
आम लक्षण
- छोटी-छोटी बातों पर आपा खो देना
- चिल्लाना, गाली देना, या चीज़ें फेंकना और तोड़ना
- दूसरों को धक्का देना, मारना या धमकाना
- सड़क पर गुस्सा (रोड रेज) या अजनबियों से झगड़ा
- ज़्यादातर समय तनाव, चिड़चिड़ापन या बेचैनी महसूस करना
- गुस्से के बाद पछतावा, अपराधबोध या शर्म
- परिवार के लोगों का आपकी प्रतिक्रिया से डरना
- गुस्से की वजह से काम पर या क़ानूनी परेशानियाँ
कारण और जोखिम
- लंबा तनाव, नींद की कमी या थकान
- डिप्रेशन, चिंता या बाइपोलर डिसऑर्डर
- ADHD, जो आवेग पर काबू को प्रभावित करता है
- शराब या नशे का सेवन
- पुराना ट्रॉमा, या गुस्से और हिंसा के माहौल में बड़ा होना
- दूसरी भावनाओं को पहचानने और ज़ाहिर करने में कठिनाई
मनोचिकित्सक को कब दिखाना चाहिए?
अगर ये परेशानियाँ दो हफ़्ते से ज़्यादा समय से हैं, बार-बार लौट आती हैं, या आपके काम, पढ़ाई, रिश्तों या दिनचर्या पर असर डाल रही हैं, तो अपॉइंटमेंट लेने के बारे में सोचें। हालात असहनीय होने तक इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं; जल्दी शुरू किया गया इलाज आमतौर पर छोटा और ज़्यादा असरदार होता है।
अगर आप या आपका कोई अपना संकट में है या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आ रहे हैं, तो नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ या भारत सरकार की निःशुल्क 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन टेली-मानस पर कॉल करें: 14416.
डॉ. सुरभि माथुर निदान कैसे करती हैं
पहला परामर्श एक इत्मीनान भरी बातचीत होती है: आपके लक्षण, वे कब से हैं, आपका मेडिकल और पारिवारिक इतिहास, नींद, तनाव और किसी नशे के बारे में। ज़रूरत हो तो डॉ. माथुर मानक रेटिंग स्केल का उपयोग करती हैं और थायरॉइड या विटामिन जैसी शारीरिक वजहों को अलग करने के लिए ब्लड टेस्ट सुझा सकती हैं। आप साफ़ समझ के साथ और अपनी सहमति से बनी इलाज योजना लेकर जाते हैं।
पहली मुलाकात में क्या होता हैइलाज के विकल्प
जाँच
यह समझना कि गुस्सा कब, कहाँ और कैसे आता है, और डिप्रेशन, ADHD, बाइपोलर डिसऑर्डर, शराब या ट्रॉमा की जाँच जो इसकी वजह हो सकते हैं।
CBT-आधारित एंगर मैनेजमेंट
अपने शुरुआती चेतावनी संकेत पहचानना, टाइम-आउट लेना, गुस्सा भड़काने वाले विचारों को चुनौती देना, और बात बिगड़ने से पहले समस्या सुलझाना।
बातचीत के कौशल
घर और काम पर असहमति और ज़रूरतें आक्रामक होने के बजाय दृढ़ता से कहना सीखना।
परिवार या दंपति के साथ सेशन
आपकी सहमति से परिवार को शामिल करना, ताकि भरोसा फिर से बने, माहौल शांत करने के तरीके तय हों, और सब सुरक्षित रहें।
ज़रूरत पड़ने पर दवा
जब गुस्सा डिप्रेशन, ADHD या बाइपोलर डिसऑर्डर जैसी किसी स्थिति का हिस्सा हो, तो उस स्थिति का इलाज अक्सर गुस्से के दौरों को काफ़ी कम कर देता है।
इलाज में कितना समय लगता है?
ज़्यादातर एंगर मैनेजमेंट कार्यक्रम आठ से बारह सेशन के होते हैं, और कई लोग कौशल अपनाने के पहले कुछ हफ़्तों में ही गुस्से के दौरे कम और हल्के होते देखते हैं। जब किसी अंदरूनी समस्या का इलाज होता है, तो सुधार और भी जल्दी हो सकता है।
जयपुर में डॉ. सुरभि माथुर को क्यों चुनें?
- MBBS, MD (मनोरोग), नारायणा हॉस्पिटल में कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट
- साइकोथेरेपी और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) में प्रशिक्षित
- थेरेपी, दवा और जीवनशैली को मिलाकर बनी इलाज योजना
- पूरी तरह गोपनीय, बिना जजमेंट के परामर्श
- निर्माण नगर में क्लिनिक, सोम–शनि अपॉइंटमेंट से
- ज़रूरत पड़ने पर नारायणा हॉस्पिटल में भर्ती की सुविधा

