डॉ. सुरभि माथुर निर्माण नगर, जयपुर के अपने क्लिनिक में नौकरीपेशा लोगों, व्यवसायियों, गृहिणियों और देखभाल करने वालों को लंबे तनाव से निपटने और बर्नआउट से उबरने में मदद करती हैं।
तनाव और बर्नआउट को समझें
तनाव दबाव के प्रति शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया है, और थोड़े समय के लिए यह काम का भी हो सकता है। जब दबाव लगातार बना रहे और संभलने का समय न मिले, तो तनाव लंबा खिंच जाता है और नींद, मूड, याददाश्त, पाचन और ब्लड प्रेशर पर असर डालने लगता है। बर्नआउट काम से जुड़े लंबे तनाव के बाद आने वाली थकान है; विश्व स्वास्थ्य संगठन इसे ऊर्जा का खत्म हो जाना, अपने काम से मानसिक दूरी या चिढ़, और काम में कम प्रभावी होना बताता है।
बर्नआउट अपने आप में मानसिक बीमारी नहीं है, लेकिन यह डिप्रेशन, एंग्ज़ाइटी और अनिद्रा से बहुत मिलता-जुलता है और इनमें बदल भी सकता है। इनमें फ़र्क करना मनोचिकित्सक का काम है, क्योंकि डिप्रेशन या एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर को अपना इलाज चाहिए, सिर्फ़ छुट्टी नहीं।
आम लक्षण
- ऐसी थकान जो आराम या छुट्टी से भी न जाए
- काम से डर लगना, या उससे कटाव और चिढ़ महसूस होना
- चिड़चिड़ापन, बेसब्री या गुस्से के दौरे
- ध्यान न लगना, भूलना और ग़लतियाँ होना
- नींद आने या टिकने में परेशानी
- सिरदर्द, गर्दन में दर्द, एसिडिटी या बार-बार बीमार पड़ना
- संभलने के लिए चाय, कॉफ़ी, सिगरेट या शराब का सहारा
- परिवार, दोस्तों और पसंदीदा चीज़ों से दूर होना
कारण और जोखिम
- काम का ज़्यादा बोझ, लंबे घंटे या हर समय फ़ोन पर उपलब्ध रहना
- काम पर कम नियंत्रण, या मेहनत की कद्र न होना
- पैसों का दबाव या व्यवसाय की अनिश्चितता
- बीमार बच्चे, माता-पिता या जीवनसाथी की देखभाल
- काम पर या घर में टकराव
- हर काम में परफ़ेक्शन चाहना और 'ना' न कह पाना
मनोचिकित्सक को कब दिखाना चाहिए?
अगर ये परेशानियाँ दो हफ़्ते से ज़्यादा समय से हैं, बार-बार लौट आती हैं, या आपके काम, पढ़ाई, रिश्तों या दिनचर्या पर असर डाल रही हैं, तो अपॉइंटमेंट लेने के बारे में सोचें। हालात असहनीय होने तक इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं; जल्दी शुरू किया गया इलाज आमतौर पर छोटा और ज़्यादा असरदार होता है।
अगर आप या आपका कोई अपना संकट में है या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आ रहे हैं, तो नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ या भारत सरकार की निःशुल्क 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन टेली-मानस पर कॉल करें: 14416.
डॉ. सुरभि माथुर निदान कैसे करती हैं
पहला परामर्श एक इत्मीनान भरी बातचीत होती है: आपके लक्षण, वे कब से हैं, आपका मेडिकल और पारिवारिक इतिहास, नींद, तनाव और किसी नशे के बारे में। ज़रूरत हो तो डॉ. माथुर मानक रेटिंग स्केल का उपयोग करती हैं और थायरॉइड या विटामिन जैसी शारीरिक वजहों को अलग करने के लिए ब्लड टेस्ट सुझा सकती हैं। आप साफ़ समझ के साथ और अपनी सहमति से बनी इलाज योजना लेकर जाते हैं।
पहली मुलाकात में क्या होता हैइलाज के विकल्प
जाँच
डिप्रेशन, एंग्ज़ाइटी, अनिद्रा और शराब की जाँच, और थकान ज़्यादा हो तो थायरॉइड, हीमोग्लोबिन और विटामिन जैसे आसान ब्लड टेस्ट।
CBT और तनाव प्रबंधन
परफ़ेक्शनिज़्म और हर बात में सबसे बुरा सोचने जैसे विचारों को पहचानना जो तनाव बनाए रखते हैं, और योजना बनाने, प्राथमिकता तय करने और सीमाएँ खींचने के व्यावहारिक तरीके सीखना।
नींद और दिनचर्या लौटाना
नियमित नींद, भोजन और शारीरिक गतिविधि, और देर रात की स्क्रीन, चाय-कॉफ़ी और शराब कम करना जो शरीर को हर समय सतर्क रखते हैं।
काम और ज़िंदगी की योजना
व्यावहारिक बदलाव तय करना, तय छुट्टी से लेकर नियोक्ता या परिवार से काम और ज़िम्मेदारियों पर बात करने तक।
ज़रूरत पड़ने पर दवा
अगर डिप्रेशन, एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर या अनिद्रा हो गई है, तो थेरेपी के साथ आदत न डालने वाली दवाएँ सुझाई जा सकती हैं।
इलाज में कितना समय लगता है?
साफ़ योजना के साथ कई लोग कुछ ही हफ़्तों में काफ़ी बेहतर महसूस करते हैं, लेकिन बर्नआउट से पूरी तरह उबरने में अक्सर तीन से छह महीने लगते हैं। जब लक्षणों के साथ तनाव की वजहों पर भी काम होता है, तो सुधार ज़्यादा टिकाऊ रहता है।
जयपुर में डॉ. सुरभि माथुर को क्यों चुनें?
- MBBS, MD (मनोरोग), नारायणा हॉस्पिटल में कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट
- साइकोथेरेपी और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) में प्रशिक्षित
- थेरेपी, दवा और जीवनशैली को मिलाकर बनी इलाज योजना
- पूरी तरह गोपनीय, बिना जजमेंट के परामर्श
- निर्माण नगर में क्लिनिक, सोम–शनि अपॉइंटमेंट से
- ज़रूरत पड़ने पर नारायणा हॉस्पिटल में भर्ती की सुविधा

