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Dr. Surabhi Mathur – Psychiatrist in Jaipur

विशेषज्ञ इलाज · वयस्कों

जयपुर में शराब की लत का इलाज (नशा मुक्ति)

शौक़ में शुरू हुई शराब धीरे-धीरे ऐसी ज़रूरत बन सकती है कि उसके बिना नींद न आए, सुबह हाथ काँपें, या दिन न कटे। जब तक परिवार मदद ढूँढता है, तब तक अक्सर सेहत की परेशानियाँ, पैसों की तंगी और घर में टूटा भरोसा सामने आ चुका होता है। शराब पर निर्भरता एक मेडिकल स्थिति है, और इसका इलाज संभव है।

शराब की लत का इलाज, डॉ. सुरभि माथुर, जयपुर
निर्माण नगर क्लिनिक, जयपुर में डॉ. सुरभि माथुर के साथ इलाज

डॉ. सुरभि माथुर निर्माण नगर, जयपुर के अपने क्लिनिक में शराब की लत का गोपनीय इलाज करती हैं: डॉक्टर की निगरानी में शराब छुड़ाना, तलब कम करने वाली दवाएँ, और व्यक्ति व परिवार दोनों के लिए काउंसलिंग। जब भर्ती ज़्यादा सुरक्षित हो, तो इसकी व्यवस्था नारायणा हॉस्पिटल में होती है।

शराब की लत को समझें

शराब से जुड़ी समस्या नुकसानदेह पीने से लेकर गंभीर निर्भरता तक हो सकती है। निर्भरता में दिमाग़ और शरीर नियमित शराब के आदी हो जाते हैं, इसलिए तलब तेज़ हो जाती है, नियंत्रण छूट जाता है, और अचानक बंद करने पर विड्रॉल होता है: हाथ काँपना, पसीना, घबराहट, ख़राब नींद, और गंभीर मामलों में दौरे पड़ना या 'डिलीरियम ट्रेमेंस' नाम की ख़तरनाक भ्रम की हालत।

ज़्यादा शराब लिवर, पेट, दिल, नसों और दिमाग़ को नुकसान पहुँचाती है, और डिप्रेशन, चिंता, नींद की समस्या, दुर्घटनाओं और घरेलू कलह से गहराई से जुड़ी है। इलाज तब सबसे अच्छा काम करता है जब सिर्फ़ शराब बंद करने के बजाय इन सब पर एक साथ ध्यान दिया जाए।

आम लक्षण

  • सोचे से ज़्यादा या ज़्यादा देर तक पीना
  • कम करने या छोड़ने की बार-बार नाकाम कोशिश
  • तेज़ तलब, या दिन भर शराब के बारे में सोचना
  • सुबह हाथ काँपना, पसीना, जी मिचलाना या बेचैनी, जो पीने से ठीक हो
  • उतना ही असर पाने के लिए ज़्यादा शराब की ज़रूरत
  • अकेले, छिपकर या दिन में जल्दी पीना
  • शराब की वजह से काम या घर की ज़िम्मेदारियाँ छूटना
  • शराब से जुड़े झगड़े, दुर्घटनाएँ या सेहत की परेशानियाँ

कारण और जोखिम

  • परिवार में शराब की समस्या का इतिहास
  • तनाव, चिंता, उदासी या नींद न आने से निपटने के लिए पीना
  • कम उम्र में पीना शुरू करना
  • ऐसा माहौल या काम जहाँ ज़्यादा पीना आम हो
  • बिना इलाज का डिप्रेशन, चिंता, ADHD या ट्रॉमा

मनोचिकित्सक को कब दिखाना चाहिए?

अगर ये परेशानियाँ दो हफ़्ते से ज़्यादा समय से हैं, बार-बार लौट आती हैं, या आपके काम, पढ़ाई, रिश्तों या दिनचर्या पर असर डाल रही हैं, तो अपॉइंटमेंट लेने के बारे में सोचें। हालात असहनीय होने तक इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं; जल्दी शुरू किया गया इलाज आमतौर पर छोटा और ज़्यादा असरदार होता है।

अगर आप या आपका कोई अपना संकट में है या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आ रहे हैं, तो नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ या भारत सरकार की निःशुल्क 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन टेली-मानस पर कॉल करें: 14416.

डॉ. सुरभि माथुर निदान कैसे करती हैं

पहला परामर्श एक इत्मीनान भरी बातचीत होती है: आपके लक्षण, वे कब से हैं, आपका मेडिकल और पारिवारिक इतिहास, नींद, तनाव और किसी नशे के बारे में। ज़रूरत हो तो डॉ. माथुर मानक रेटिंग स्केल का उपयोग करती हैं और थायरॉइड या विटामिन जैसी शारीरिक वजहों को अलग करने के लिए ब्लड टेस्ट सुझा सकती हैं। आप साफ़ समझ के साथ और अपनी सहमति से बनी इलाज योजना लेकर जाते हैं।

पहली मुलाकात में क्या होता है

इलाज के विकल्प

  • जाँच

    आप कितना और कब से पी रहे हैं, पहले कभी विड्रॉल या दौरे पड़े हैं या नहीं, आपकी शारीरिक सेहत, और लिवर व दूसरे ब्लड टेस्ट।

  • डॉक्टर की निगरानी में डिटॉक्स

    लगभग एक हफ़्ते में दवाओं और थायमिन समेत विटामिनों के साथ सुरक्षित तरीके से शराब छुड़ाना; सुरक्षित हो तो घर से आते-जाते, और गंभीर विड्रॉल की आशंका हो तो नारायणा हॉस्पिटल में भर्ती करके।

  • तलब कम करने वाली दवाएँ

    नाल्ट्रेक्सोन या एकैम्प्रोसेट जैसी प्रमाणित दवाएँ तलब और दोबारा पीने का ख़तरा कम करती हैं। डाइसल्फ़िरम केवल व्यक्ति की पूरी जानकारी और सहमति से दी जाती है।

  • काउंसलिंग और दोबारा पीने से बचाव

    बदलाव के लिए प्रेरणा बढ़ाना, ट्रिगर पहचानना, और पार्टी, त्योहार और तनाव भरे दिनों जैसे जोखिम वाले मौक़ों की पहले से योजना बनाना।

  • परिवार की भागीदारी

    परिवार को सहयोग देने, उल्टा असर करने वाली बहसों से बचने और दोबारा पीने के शुरुआती संकेत पहचानने में मदद।

  • अंदरूनी समस्याओं का इलाज

    डिप्रेशन, चिंता, अनिद्रा या ट्रॉमा का साथ में इलाज, क्योंकि अक्सर यही पीने की वजह बनते हैं।

इलाज में कितना समय लगता है?

डिटॉक्स में आमतौर पर पाँच से सात दिन लगते हैं, लेकिन रिकवरी लंबी होती है: शराब छोड़ने के बाद पहले तीन से छह महीनों में दोबारा पीने का ख़तरा सबसे ज़्यादा होता है, इसलिए इस दौरान नियमित फ़ॉलो-अप चलता है। एक बार फिसलना हार नहीं, योजना बदलने का संकेत है, और बहुत से लोग हमेशा के लिए शराब से दूर रहते हैं।

जयपुर में डॉ. सुरभि माथुर को क्यों चुनें?

  • MBBS, MD (मनोरोग), नारायणा हॉस्पिटल में कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट
  • साइकोथेरेपी और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) में प्रशिक्षित
  • थेरेपी, दवा और जीवनशैली को मिलाकर बनी इलाज योजना
  • पूरी तरह गोपनीय, बिना जजमेंट के परामर्श
  • निर्माण नगर में क्लिनिक, सोम–शनि अपॉइंटमेंट से
  • ज़रूरत पड़ने पर नारायणा हॉस्पिटल में भर्ती की सुविधा

सवाल-जवाब

जयपुर में शराब की लत का इलाज (नशा मुक्ति): सवाल-जवाब

कोई और सवाल हो तो हमें कॉल करें, हम मदद करेंगे।

कॉल करें 72404-45656

क्या हम परिवार के सदस्य को बताए बिना खाने में शराब छुड़ाने की दवा मिला सकते हैं?

नहीं। इस काम के लिए बिकने वाली डाइसल्फ़िरम जैसी दवाएँ, अगर व्यक्ति अनजाने में शराब पी ले, तो गंभीर और ख़तरनाक प्रतिक्रिया कर सकती हैं। इलाज खुलकर, व्यक्ति की सहमति से ही होना चाहिए। परिवार पहले ख़ुद आकर सलाह ले सकता है कि व्यक्ति से कैसे बात करें।

क्या शराब छुड़ाने के लिए भर्ती होना ज़रूरी है?

हमेशा नहीं। कई लोग दवाओं और करीबी फ़ॉलो-अप के साथ घर से आते-जाते सुरक्षित रूप से शराब छोड़ सकते हैं। रोज़ बहुत ज़्यादा पीने वालों, जिन्हें पहले दौरे या डिलीरियम ट्रेमेंस हो चुका हो, गंभीर शारीरिक बीमारी वालों, या जिनके घर पर देखरेख करने वाला कोई न हो, उन्हें भर्ती की सलाह दी जाती है।

क्या पूरी तरह छोड़ने के बजाय सिर्फ़ कम कर सकते हैं?

जिनका पीना नुकसानदेह है लेकिन अभी निर्भरता नहीं बनी, उनके लिए सुरक्षित सीमा तक कम करना ठीक लक्ष्य हो सकता है। जो शराब पर निर्भर हैं, उनके लिए पूरी तरह छोड़ना आमतौर पर ज़्यादा सुरक्षित और सफल रहता है, और पहली विज़िट में इस पर ईमानदारी से बात होती है।

क्या मेरे इलाज के बारे में किसी और को पता चलेगा?

नहीं। परामर्श और रिकॉर्ड पूरी तरह गोपनीय रहते हैं और आपकी सहमति के बिना नियोक्ता या किसी और को नहीं बताए जाते।

शराब की लत के बारे में बात करने के लिए तैयार हैं?

निर्माण नगर क्लिनिक में डॉ. सुरभि माथुर से गोपनीय परामर्श बुक करें, या व्हाट्सएप पर संदेश भेजें, हम आपकी सुविधा के अनुसार समय तय करेंगे।

संकट की स्थिति में या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आएँ तो टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 (निःशुल्क, 24×7) पर कॉल करें या नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ।