डिप्रेशन मनोचिकित्सक के पास आने का सबसे आम कारण है, और सबसे ज़्यादा ठीक होने वाली समस्याओं में से एक भी। नारायणा हॉस्पिटल की कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट डॉ. सुरभि माथुर निर्माण नगर, जयपुर के अपने क्लिनिक में सही निदान, CBT जैसी थेरेपी और ज़रूरत पड़ने पर दवा से डिप्रेशन का इलाज करती हैं।
डिप्रेशन को समझें
क्लिनिकल डिप्रेशन एक मेडिकल स्थिति है जो आपके महसूस करने, सोचने, सोने और काम करने के तरीके को बदल देती है। उदासी हर किसी को होती है, लेकिन डिप्रेशन कम से कम दो हफ़्ते तक, दिन के ज़्यादातर समय रहता है और रोज़मर्रा के काम भारी लगने लगते हैं।
डिप्रेशन अकेले भी हो सकता है और चिंता, लंबी बीमारी, थायरॉइड की समस्या, नशे, गर्भावस्था और प्रसव के बाद, या बाइपोलर डिसऑर्डर के साथ भी। इनमें फ़र्क पहचानना मनोचिकित्सक का पहला काम है, क्योंकि सही इलाज कारण पर निर्भर करता है।
आम लक्षण
- लगातार उदासी, खालीपन या निराशा
- पसंदीदा चीज़ों में रुचि या खुशी खत्म होना
- आराम के बाद भी थकान और ऊर्जा की कमी
- बहुत कम या बहुत ज़्यादा नींद
- भूख या वज़न में बदलाव
- ध्यान लगाने या फ़ैसले लेने में मुश्किल
- अपराधबोध या ख़ुद को बेकार समझना
- चिड़चिड़ापन, बेचैनी या सुस्ती
- बिना कारण दर्द, सिरदर्द या पेट की परेशानी
- मौत या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार
कारण और जोखिम
- दिमाग़ के रसायनों और तनाव हार्मोन में बदलाव
- परिवार में डिप्रेशन या मूड की बीमारी का इतिहास
- बड़ा तनाव: किसी अपने को खोना, रिश्तों की परेशानी, पैसे या नौकरी का दबाव
- लंबी बीमारी, पुराना दर्द या हार्मोन में बदलाव
- बचपन की कठिन परिस्थितियाँ या ट्रॉमा
- शराब या नशे का सेवन
मनोचिकित्सक को कब दिखाना चाहिए?
अगर ये परेशानियाँ दो हफ़्ते से ज़्यादा समय से हैं, बार-बार लौट आती हैं, या आपके काम, पढ़ाई, रिश्तों या दिनचर्या पर असर डाल रही हैं, तो अपॉइंटमेंट लेने के बारे में सोचें। हालात असहनीय होने तक इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं; जल्दी शुरू किया गया इलाज आमतौर पर छोटा और ज़्यादा असरदार होता है।
अगर आप या आपका कोई अपना संकट में है या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आ रहे हैं, तो नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ या भारत सरकार की निःशुल्क 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन टेली-मानस पर कॉल करें: 14416.
डॉ. सुरभि माथुर निदान कैसे करती हैं
पहला परामर्श एक इत्मीनान भरी बातचीत होती है: आपके लक्षण, वे कब से हैं, आपका मेडिकल और पारिवारिक इतिहास, नींद, तनाव और किसी नशे के बारे में। ज़रूरत हो तो डॉ. माथुर मानक रेटिंग स्केल का उपयोग करती हैं और थायरॉइड या विटामिन जैसी शारीरिक वजहों को अलग करने के लिए ब्लड टेस्ट सुझा सकती हैं। आप साफ़ समझ के साथ और अपनी सहमति से बनी इलाज योजना लेकर जाते हैं।
पहली मुलाकात में क्या होता हैइलाज के विकल्प
कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT)
एक व्यवस्थित टॉक-थेरेपी जो डिप्रेशन को बनाए रखने वाले विचारों और आदतों को पहचानने और बदलने में मदद करती है।
एंटीडिप्रेसेंट दवाएँ
मध्यम से गंभीर डिप्रेशन में आधुनिक एंटीडिप्रेसेंट (जैसे SSRI) असरदार होती हैं और इनकी आदत नहीं पड़ती। खुराक सावधानी से तय की जाती है और फ़ॉलो-अप पर जाँची जाती है।
दिनचर्या और जीवनशैली
धीरे-धीरे दिनचर्या, नींद, व्यायाम और लोगों से मिलना-जुलना फिर से शुरू करना, जो इलाज के साथ मूड को बेहतर बनाता है।
परिवार की भागीदारी
आपकी सहमति से परिवार के लोग समझ सकते हैं कि रिकवरी में कैसे साथ दें और शुरुआती चेतावनी संकेत कैसे पहचानें।
दोबारा होने से बचाव
ठीक महसूस होने के बाद कुछ महीने इलाज जारी रखना और तनाव के समय की योजना बनाना डिप्रेशन के लौटने की संभावना कम करता है।
इलाज में कितना समय लगता है?
ज़्यादातर लोगों को इलाज शुरू करने के दो से छह हफ़्तों में कुछ सुधार महसूस होने लगता है, और कुछ महीनों में पूरी रिकवरी होती है। दवा आमतौर पर ठीक होने के बाद छह से बारह महीने तक जारी रखी जाती है, फिर डॉक्टर की देखरेख में धीरे-धीरे कम की जाती है, अचानक बंद नहीं की जाती।
जयपुर में डॉ. सुरभि माथुर को क्यों चुनें?
- MBBS, MD (मनोरोग), नारायणा हॉस्पिटल में कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट
- साइकोथेरेपी और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) में प्रशिक्षित
- थेरेपी, दवा और जीवनशैली को मिलाकर बनी इलाज योजना
- पूरी तरह गोपनीय, बिना जजमेंट के परामर्श
- निर्माण नगर में क्लिनिक, हफ़्ते के सातों दिन खुला
- ज़रूरत पड़ने पर नारायणा हॉस्पिटल में भर्ती की सुविधा

