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Dr. Surabhi Mathur – Psychiatrist in Jaipur

विशेषज्ञ इलाज · वयस्कों

जयपुर में चिंता और पैनिक अटैक का इलाज

हर समय चिंता, दिल की तेज़ धड़कन, अचानक घबराहट, या डर की वजह से कुछ जगहों और हालात से बचना, यह सब रोज़मर्रा की ज़िंदगी को थका देने वाला बना देता है। एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर बहुत आम हैं और सही इलाज से अच्छी तरह ठीक होते हैं।

चिंता (एंग्ज़ाइटी) का इलाज, डॉ. सुरभि माथुर, जयपुर
निर्माण नगर क्लिनिक, जयपुर में डॉ. सुरभि माथुर के साथ इलाज

डॉ. सुरभि माथुर निर्माण नगर, जयपुर के अपने क्लिनिक में जनरलाइज़्ड एंग्ज़ाइटी, पैनिक डिसऑर्डर, सोशल एंग्ज़ाइटी, फ़ोबिया और हेल्थ एंग्ज़ाइटी का इलाज CBT, साइकोथेरेपी और ज़रूरत पड़ने पर दवा से करती हैं।

चिंता (एंग्ज़ाइटी) को समझें

थोड़ी चिंता तनाव के प्रति सामान्य प्रतिक्रिया है। यह एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर तब बनती है जब चिंता या डर हालात से कहीं ज़्यादा हो, महीनों तक बना रहे, और आपके कामों को सीमित करने लगे।

इसके मुख्य प्रकार हैं: जनरलाइज़्ड एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर (कई बातों की लगातार चिंता), पैनिक डिसऑर्डर (बार-बार अचानक तीव्र डर के दौरे), सोशल एंग्ज़ाइटी, किसी ख़ास चीज़ का फ़ोबिया, और हेल्थ एंग्ज़ाइटी। एंग्ज़ाइटी अक्सर डिप्रेशन, अनिद्रा और OCD के साथ होती है।

आम लक्षण

  • लगातार चिंता जिसे रोकना मुश्किल हो
  • बेचैनी, घबराहट या जल्दी थक जाना
  • दिल की तेज़ धड़कन, सीने में जकड़न या साँस फूलना
  • पसीना, कंपकंपी, चक्कर या झुनझुनी
  • अचानक पैनिक अटैक, मौत या नियंत्रण खोने का डर
  • कुछ जगहों, लोगों या हालात से बचना
  • दिमाग़ चलते रहने की वजह से नींद न आना
  • बार-बार लक्षण जाँचना या सेहत को लेकर भरोसा माँगना

कारण और जोखिम

  • आनुवंशिक प्रवृत्ति और परिवार का इतिहास
  • दिमाग़ के तनाव-प्रतिक्रिया तंत्र में असंतुलन
  • काम, पढ़ाई या घर का लंबा तनाव
  • डरावने या दर्दनाक अनुभव
  • ज़्यादा चाय-कॉफ़ी, निकोटीन, शराब या नशा छोड़ने के असर
  • थायरॉइड जैसी शारीरिक वजहें, जिनकी जाँच इलाज के दौरान की जाती है

मनोचिकित्सक को कब दिखाना चाहिए?

अगर ये परेशानियाँ दो हफ़्ते से ज़्यादा समय से हैं, बार-बार लौट आती हैं, या आपके काम, पढ़ाई, रिश्तों या दिनचर्या पर असर डाल रही हैं, तो अपॉइंटमेंट लेने के बारे में सोचें। हालात असहनीय होने तक इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं; जल्दी शुरू किया गया इलाज आमतौर पर छोटा और ज़्यादा असरदार होता है।

अगर आप या आपका कोई अपना संकट में है या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आ रहे हैं, तो नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ या भारत सरकार की निःशुल्क 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन टेली-मानस पर कॉल करें: 14416.

डॉ. सुरभि माथुर निदान कैसे करती हैं

पहला परामर्श एक इत्मीनान भरी बातचीत होती है: आपके लक्षण, वे कब से हैं, आपका मेडिकल और पारिवारिक इतिहास, नींद, तनाव और किसी नशे के बारे में। ज़रूरत हो तो डॉ. माथुर मानक रेटिंग स्केल का उपयोग करती हैं और थायरॉइड या विटामिन जैसी शारीरिक वजहों को अलग करने के लिए ब्लड टेस्ट सुझा सकती हैं। आप साफ़ समझ के साथ और अपनी सहमति से बनी इलाज योजना लेकर जाते हैं।

पहली मुलाकात में क्या होता है

इलाज के विकल्प

  • कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT)

    एंग्ज़ाइटी के लिए सबसे असरदार टॉक-थेरेपी। आप घबराहट वाले अनुमानों को चुनौती देना और डर वाले हालात का योजनाबद्ध तरीके से धीरे-धीरे सामना करना सीखते हैं।

  • दवाएँ

    SSRI जैसी दवाएँ कुछ हफ़्तों में चिंता कम करती हैं और इनकी आदत नहीं पड़ती। शांत करने वाली कुछ दवाएँ, अगर दी भी जाएँ, तो बहुत कम समय के लिए, क्योंकि उनसे निर्भरता हो सकती है।

  • पैनिक को संभालना

    साँस लेने का सही तरीका और शरीर के 'अलार्म' को समझना, ताकि पैनिक अटैक का असर कम हो जाए।

  • रिलैक्सेशन और जीवनशैली

    नींद की दिनचर्या, नियमित व्यायाम, चाय-कॉफ़ी कम करना और तनाव से निपटने के व्यावहारिक तरीके।

इलाज में कितना समय लगता है?

CBT या दवा शुरू करने के छह से बारह हफ़्तों में कई लोगों को साफ़ सुधार दिखता है। थेरेपी में सीखे तरीके इलाज खत्म होने के बाद भी काम आते हैं, जिससे एंग्ज़ाइटी लौटने की संभावना कम होती है।

जयपुर में डॉ. सुरभि माथुर को क्यों चुनें?

  • MBBS, MD (मनोरोग), नारायणा हॉस्पिटल में कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट
  • साइकोथेरेपी और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) में प्रशिक्षित
  • थेरेपी, दवा और जीवनशैली को मिलाकर बनी इलाज योजना
  • पूरी तरह गोपनीय, बिना जजमेंट के परामर्श
  • निर्माण नगर में क्लिनिक, हफ़्ते के सातों दिन खुला
  • ज़रूरत पड़ने पर नारायणा हॉस्पिटल में भर्ती की सुविधा

सवाल-जवाब

जयपुर में चिंता और पैनिक अटैक का इलाज: सवाल-जवाब

कोई और सवाल हो तो हमें कॉल करें, हम मदद करेंगे।

कॉल करें 72404-45656

क्या पैनिक अटैक ख़तरनाक होता है?

पैनिक अटैक बहुत डरावना लगता है, धड़कन तेज़ होती है और साँस फूलती है, लेकिन यह ख़तरनाक नहीं होता और कुछ मिनटों में ठीक हो जाता है। पहली बार ऐसा हो तो दिल या थायरॉइड की जाँच के लिए डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ।

एंग्ज़ाइटी के लिए मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक, किसके पास जाएँ?

मनोचिकित्सक निदान पक्का कर सकते हैं, शारीरिक कारणों की जाँच कर सकते हैं, और थेरेपी व दवा दोनों दे सकते हैं। हल्की एंग्ज़ाइटी में अक्सर थेरेपी काफ़ी होती है; मध्यम से गंभीर में दोनों का मेल बेहतर काम करता है।

क्या एंग्ज़ाइटी की दवाओं की आदत पड़ जाएगी?

एंग्ज़ाइटी के लिए पहली पसंद की दवाओं की आदत नहीं पड़ती। निर्भरता पैदा करने वाली शामक दवाएँ बहुत कम और थोड़े समय के लिए, करीबी निगरानी में ही दी जाती हैं।

क्या एंग्ज़ाइटी पूरी तरह ठीक हो सकती है?

एंग्ज़ाइटी डिसऑर्डर वाले ज़्यादातर लोग अच्छी तरह ठीक होकर सामान्य जीवन जीते हैं। कुछ लोगों में तनाव के समय चिंता बढ़ने की प्रवृत्ति रहती है, और थेरेपी में सीखे तरीके इसे शुरुआत में ही संभालने में मदद करते हैं।

चिंता (एंग्ज़ाइटी) के बारे में बात करने के लिए तैयार हैं?

निर्माण नगर क्लिनिक में डॉ. सुरभि माथुर से गोपनीय परामर्श बुक करें, या व्हाट्सएप पर संदेश भेजें, हम आपकी सुविधा के अनुसार समय तय करेंगे।

संकट की स्थिति में या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आएँ तो टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 (निःशुल्क, 24×7) पर कॉल करें या नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ।