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Dr. Surabhi Mathur – Psychiatrist in Jaipur

विशेषज्ञ इलाज · वयस्कों

जयपुर में पैनिक अटैक का इलाज

अचानक तेज़ डर, धड़कता दिल, साँस फूलना और पक्का लगना कि अभी गिर जाएँगे या मर जाएँगे: पैनिक अटैक इंसान के सबसे डरावने अनुभवों में से एक है। कई लोग एक से ज़्यादा बार इमरजेंसी पहुँच जाते हैं, तब जाकर कोई समझाता है कि असल में हुआ क्या था।

पैनिक अटैक का इलाज, डॉ. सुरभि माथुर, जयपुर
निर्माण नगर क्लिनिक, जयपुर में डॉ. सुरभि माथुर के साथ इलाज

डॉ. सुरभि माथुर निर्माण नगर, जयपुर के अपने क्लिनिक में पैनिक अटैक और पैनिक डिसऑर्डर का इलाज CBT, ज़रूरत पड़ने पर दवा, और आपके शरीर में क्या हो रहा है इसकी साफ़ समझ के साथ करती हैं।

पैनिक अटैक को समझें

पैनिक अटैक तीव्र डर की एक लहर है जो कुछ ही मिनटों में चरम पर पहुँचती है और तेज़ शारीरिक लक्षणों के साथ आती है। बहुत ज़्यादा तनाव में किसी को भी एक बार ऐसा अटैक आ सकता है। पैनिक डिसऑर्डर तब माना जाता है जब अटैक बिना वजह बार-बार आते रहें और आप हफ़्तों तक अगले अटैक की चिंता करते रहें, या उससे बचने के लिए अपनी ज़िंदगी बदलने लगें।

पैनिक डिसऑर्डर वाले कई लोग ऐसी जगहों से बचने लगते हैं जहाँ से निकलना मुश्किल लगे, जैसे भीड़ भरे बाज़ार, बस, लिफ़्ट या लंबा सफ़र। इसे एगोराफ़ोबिया कहते हैं, और इलाज के बिना यह धीरे-धीरे व्यक्ति की दुनिया छोटी कर देता है। पैनिक अक्सर डिप्रेशन, दूसरी एंग्ज़ाइटी समस्याओं, या ज़्यादा चाय-कॉफ़ी, शराब या नशे के साथ होता है।

आम लक्षण

  • अचानक दिल का ज़ोर से या तेज़ धड़कना
  • सीने में जकड़न या दर्द
  • साँस फूलना या दम घुटने जैसा लगना
  • पसीना, कंपकंपी या शरीर काँपना
  • चक्कर, सिर हल्का लगना या बेहोशी जैसा महसूस होना
  • हाथों या चेहरे में झुनझुनी या सुन्नपन
  • सब कुछ अवास्तविक लगना या ख़ुद से अलग महसूस होना
  • मरने, नियंत्रण खोने या पागल हो जाने का डर
  • अगले अटैक की लगातार चिंता
  • अटैक के डर से जगहों, सफ़र या व्यायाम से बचना

कारण और जोखिम

  • परिवार में पैनिक या एंग्ज़ाइटी का इतिहास
  • दिमाग़ का ज़रूरत से ज़्यादा संवेदनशील 'अलार्म', जो शरीर की सामान्य अनुभूतियों को ख़तरा समझ लेता है
  • बड़ा तनाव, किसी को खोना या ज़िंदगी में बड़ा बदलाव
  • चाय-कॉफ़ी, निकोटीन, शराब या गांजा, और इन्हें छोड़ने के असर
  • थायरॉइड का ज़्यादा सक्रिय होना या दिल की धड़कन की गड़बड़ी जैसी शारीरिक वजहें, जिनकी जाँच इलाज के दौरान होती है

मनोचिकित्सक को कब दिखाना चाहिए?

अगर ये परेशानियाँ दो हफ़्ते से ज़्यादा समय से हैं, बार-बार लौट आती हैं, या आपके काम, पढ़ाई, रिश्तों या दिनचर्या पर असर डाल रही हैं, तो अपॉइंटमेंट लेने के बारे में सोचें। हालात असहनीय होने तक इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं; जल्दी शुरू किया गया इलाज आमतौर पर छोटा और ज़्यादा असरदार होता है।

अगर आप या आपका कोई अपना संकट में है या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आ रहे हैं, तो नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ या भारत सरकार की निःशुल्क 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन टेली-मानस पर कॉल करें: 14416.

डॉ. सुरभि माथुर निदान कैसे करती हैं

पहला परामर्श एक इत्मीनान भरी बातचीत होती है: आपके लक्षण, वे कब से हैं, आपका मेडिकल और पारिवारिक इतिहास, नींद, तनाव और किसी नशे के बारे में। ज़रूरत हो तो डॉ. माथुर मानक रेटिंग स्केल का उपयोग करती हैं और थायरॉइड या विटामिन जैसी शारीरिक वजहों को अलग करने के लिए ब्लड टेस्ट सुझा सकती हैं। आप साफ़ समझ के साथ और अपनी सहमति से बनी इलाज योजना लेकर जाते हैं।

पहली मुलाकात में क्या होता है

इलाज के विकल्प

  • शारीरिक जाँच और समझ

    आसान जाँचों से दिल, थायरॉइड और दूसरी शारीरिक वजहों को अलग करना, और पैनिक का चक्र समझाना ताकि लक्षण किसी आपदा जैसे न लगें।

  • पैनिक के लिए CBT

    पैनिक डिसऑर्डर की सबसे असरदार थेरेपी: आप शरीर की अनुभूतियों को अलग तरह से समझना और धीरे-धीरे उनका और उन हालात का सामना करना सीखते हैं जिनसे आप बचते आ रहे हैं।

  • दवाएँ

    SSRI और इनसे मिलती-जुलती दवाएँ कुछ हफ़्तों में पैनिक अटैक रोकती हैं और इनकी आदत नहीं पड़ती। अल्प्राज़ोलम जैसी शामक दवाएँ अटैक रोक तो सकती हैं, लेकिन इनसे निर्भरता होती है, इसलिए इनसे बचा जाता है या बहुत कम समय के लिए दी जाती हैं।

  • साँस और ग्राउंडिंग के तरीके

    धीमी साँस और ग्राउंडिंग की तकनीकें, जिनसे अटैक जल्दी और कम डर के साथ गुज़र जाता है।

  • जीवनशैली में बदलाव

    चाय-कॉफ़ी और शराब कम करना, साथ में नियमित नींद और व्यायाम, जिससे शरीर का अलार्म-स्तर कम होता है।

इलाज में कितना समय लगता है?

CBT या दवा शुरू करने के छह से बारह हफ़्तों में ज़्यादातर लोगों के अटैक बहुत कम हो जाते हैं, और कई लोग पूरी तरह पैनिक से मुक्त हो जाते हैं। ठीक महसूस होने के बाद दवा आमतौर पर नौ से बारह महीने जारी रखी जाती है, फिर धीरे-धीरे कम की जाती है। CBT में सीखे तरीके इलाज खत्म होने के बाद भी काम करते रहते हैं।

जयपुर में डॉ. सुरभि माथुर को क्यों चुनें?

  • MBBS, MD (मनोरोग), नारायणा हॉस्पिटल में कंसल्टेंट साइकियाट्रिस्ट
  • साइकोथेरेपी और कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) में प्रशिक्षित
  • थेरेपी, दवा और जीवनशैली को मिलाकर बनी इलाज योजना
  • पूरी तरह गोपनीय, बिना जजमेंट के परामर्श
  • निर्माण नगर में क्लिनिक, सोम–शनि अपॉइंटमेंट से
  • ज़रूरत पड़ने पर नारायणा हॉस्पिटल में भर्ती की सुविधा

सवाल-जवाब

जयपुर में पैनिक अटैक का इलाज: सवाल-जवाब

कोई और सवाल हो तो हमें कॉल करें, हम मदद करेंगे।

कॉल करें 72404-45656

क्या पैनिक अटैक से हार्ट अटैक हो सकता है?

नहीं। पैनिक अटैक बिल्कुल दिल की बीमारी जैसा लग सकता है, लेकिन इससे दिल को नुकसान नहीं होता। अगर पहली बार सीने में दर्द हो, या पक्का न हो, तो इमरजेंसी में जाँच ज़रूर करवाएँ; दिल की समस्या अलग हो जाने पर पैनिक का इलाज भरोसे के साथ किया जा सकता है।

पैनिक अटैक के दौरान क्या करें?

अगर सुरक्षित हो तो जहाँ हैं वहीं रहें, धीरे-धीरे साँस लें और छोड़ने वाली साँस लंबी रखें, और ख़ुद को याद दिलाएँ कि अटैक कुछ मिनटों में चरम पर पहुँचकर उतर जाएगा। उससे लड़ने या भागने की कोशिश अक्सर उसे और बढ़ा देती है।

मुझे रात में पैनिक अटैक क्यों आते हैं?

कुछ लोग नींद से घबराहट की हालत में जाग जाते हैं। रात के ये पैनिक अटैक पैनिक डिसऑर्डर का ही हिस्सा हैं, ख़तरनाक नहीं हैं, और उसी इलाज से ठीक होते हैं।

क्या पैनिक अटैक के लिए अल्प्राज़ोलम लेना सुरक्षित है?

अल्प्राज़ोलम और ऐसी शामक दवाएँ जल्दी असर करती हैं, लेकिन नियमित लेने पर इनकी सहनशीलता और निर्भरता हो सकती है। लंबे इलाज के लिए CBT और आदत न डालने वाली दवाओं पर भरोसा किया जाता है, और कोई भी शामक दवा डॉक्टर की देखरेख में धीरे-धीरे कम की जाती है।

पैनिक अटैक के बारे में बात करने के लिए तैयार हैं?

निर्माण नगर क्लिनिक में डॉ. सुरभि माथुर से गोपनीय परामर्श बुक करें, या व्हाट्सएप पर संदेश भेजें, हम आपकी सुविधा के अनुसार समय तय करेंगे।

संकट की स्थिति में या ख़ुद को नुकसान पहुँचाने के विचार आएँ तो टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 (निःशुल्क, 24×7) पर कॉल करें या नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ।