पहले अपॉइंटमेंट लें
डॉ. सुरभि माथुर का क्लिनिक पहली मंज़िल, 28 शिव शक्ति नगर, भारत स्कूल के पास, निर्माण नगर, जयपुर में है, और सोमवार से शनिवार केवल पूर्व अपॉइंटमेंट से खुलता है। घर से निकलने से पहले 72404-45656 पर कॉल करें या व्हाट्सएप करें, और अपना समय पक्का कर लें।
बुक करते समय बताएँ कि आप किस ज़िले से और कैसे आ रहे हैं: गाड़ी, बस या ट्रेन से। इससे ऐसा समय चुनना आसान होता है जिसमें आप आराम से पहुँच सकें और, अगर दूरी कम है, उसी दिन लौट भी सकें। बहुत दूर से आ रहे हों तो एक रात जयपुर में रुकने की योजना बनाना अक्सर बेहतर रहता है; जयपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन और सिंधी कैंप बस स्टैंड के आसपास ठहरने के कई विकल्प हैं।
साथ क्या लाएँ
पहली मुलाकात में डॉक्टर को जितनी पूरी जानकारी मिलती है, निदान उतना ही सटीक होता है और जाँचें दोहरानी नहीं पड़तीं। एक फ़ाइल या थैले में ये चीज़ें रख लें:
- अब तक के सभी डॉक्टरों की पर्चियाँ, चाहे वे कितनी भी पुरानी हों
- चल रही और पहले ली गई दवाओं के पत्ते या डिब्बे, ताकि दवा का नाम और ख़ुराक सही-सही पता चले
- ब्लड टेस्ट, स्कैन या ईईजी जैसी जाँचों की रिपोर्ट
- अगर कभी अस्पताल में भर्ती हुए हों, तो उसकी डिस्चार्ज समरी
- समस्या का लिखा हुआ ब्योरा: कब शुरू हुई, क्या-क्या बदला, अब तक क्या इलाज लिया और उसका क्या असर हुआ
- शुगर, ब्लड प्रेशर, थायरॉइड या मिर्गी जैसी दूसरी बीमारियों और उनकी दवाओं की जानकारी
साथ कौन आए
मरीज़ के साथ परिवार का ऐसा सदस्य आए जो पूरी बात जानता हो और रोज़ उनके साथ रहता हो। बच्चों की समस्याओं, बुज़ुर्गों में याददाश्त की कमी, नशे या साइकोसिस जैसी कई स्थितियों में परिवार की बताई बातें निदान के लिए उतनी ही ज़रूरी होती हैं जितनी मरीज़ की अपनी बात।
बच्चों और किशोरों के साथ माता-पिता या अभिभावक ज़रूर आएँ। बालिग मरीज़ चाहें तो डॉक्टर से कुछ समय अकेले में भी बात कर सकते हैं; परिवार को परामर्श में मरीज़ की सहमति से ही शामिल किया जाता है।
अगर मरीज़ आने को तैयार नहीं है, तो परिवार पहले ख़ुद आकर सलाह ले सकता है कि उनसे कैसे बात करें।
परामर्श में क्या होता है
पहला परामर्श एक इत्मीनान भरी बातचीत होती है। डॉ. माथुर समस्या के लक्षण, वे कब से हैं, नींद, भूख, तनाव, नशे की आदत, पुरानी बीमारियों और परिवार के इतिहास के बारे में पूछती हैं। ज़रूरत हो तो रेटिंग स्केल का उपयोग होता है, और थायरॉइड या विटामिन की कमी जैसी शारीरिक वजहों को अलग करने के लिए ब्लड टेस्ट सुझाए जा सकते हैं।
बातचीत के अंत में आपको समझाया जाता है कि क्या हो रहा है, इलाज के क्या विकल्प हैं, दवा ज़रूरी है या नहीं, और थेरेपी कैसे मदद कर सकती है। जो भी सवाल हों, वहीं पूछ लें; उन्हें पहले से कागज़ पर लिखकर लाना अच्छा रहता है, क्योंकि लंबे सफ़र की थकान में बातें भूल जाती हैं।
पर्ची पर ध्यान से देख लें कि हर दवा कब और कितनी लेनी है। लौटने से पहले ही दवाएँ ख़रीद लें या पक्का कर लें कि आपके शहर में मिल जाएँगी, ताकि ख़ुराक बीच में न छूटे।
लौटने के बाद और फ़ॉलो-अप
इलाज की शुरुआत में फ़ॉलो-अप जल्दी-जल्दी होते हैं, क्योंकि दवा का असर और साइड इफ़ेक्ट देखकर ख़ुराक तय की जाती है। इलाज स्थिर होने पर मुलाकातें आमतौर पर कुछ हफ़्तों के अंतर पर रखी जा सकती हैं, ताकि आना-जाना बोझ न बने। अगली तारीख़ क्लिनिक से निकलते समय ही तय कर लें।
घर पर दवाएँ नियमित लें। शुरुआत में हल्की नींद, जी मिचलाना या सिर भारी लगना जैसे असर हो सकते हैं, जो अक्सर कुछ दिनों में कम हो जाते हैं; इनके बारे में अगली मुलाकात में बताएँ। अगर कोई परेशान करने वाला बदलाव दिखे, जैसे बहुत ज़्यादा बेचैनी, चकत्ते, असामान्य रूप से ज़्यादा नींद या अपनी जान लेने के विचार, तो अगली तारीख़ का इंतज़ार किए बिना क्लिनिक को फ़ोन करें। संकट में टेली-मानस 14416 पर कॉल करें या नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ।
हर फ़ॉलो-अप में दवाओं के पत्ते और पर्चियों की फ़ाइल साथ लाएँ, और बताएँ कि बीच के दिनों में क्या बदला। नींद, भूख या काम में मन लगने जैसी छोटी-छोटी बातें इलाज की दिशा तय करने में बहुत मदद करती हैं।
अगर किसी की जान को ख़तरा हो तो 112 पर कॉल करें या तुरंत नज़दीकी इमरजेंसी विभाग जाएँ। सलाह के लिए भारत सरकार की निःशुल्क 24×7 हेल्पलाइन टेली-मानस: 14416।
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। आपके या आपके परिवार के लिए सही इलाज डॉक्टर से मिलकर ही तय होता है। चिकित्सा अस्वीकरण
